Kachua Aur Khargosh ki Kahani

Kachua Aur Khargosh ki Kahani

कछुआ और खरगोश की कहानी | Moral Stories in Hindi Rabbit and Tortoise.

 Kachua Aur Khargosh Kahani. एक बार की बात है, एक जंगल में एक तेज़ दौड़ने वाला खरगोश और एक धीमे चलने वाला कछुआ रहते थे। खरगोश को अपनी तेज़ गति पर बहुत घमंड था, और वह अक्सर कछुए का मज़ाक उड़ाता था।

एक दिन कछुए ने खरगोश को दौड़ की चुनौती दी। खरगोश यह सुनकर हंस पड़ा और बोला, "तुम मुझसे जीत नहीं सकते, लेकिन चलो, मज़े के लिए दौड़ लगाते हैं!"

Kachua Aur Khargosh ki Kahani

दौड़ शुरू हुई। खरगोश अपनी तेज़ गति से दौड़ता हुआ आगे निकल गया, जबकि कछुआ धीरे-धीरे चलता रहा। थोड़ी दूर जाकर खरगोश ने पीछे मुड़कर देखा—कछुआ बहुत पीछे था। उसने सोचा, "कछुआ तो अभी बहुत पीछे है, क्यों न मैं थोड़ी देर आराम कर लूं?" वह एक पेड़ के नीचे आराम करने लगा और धीरे-धीरे सो गया।

उधर, कछुआ बिना रुके धीरे-धीरे अपनी मंज़िल की ओर बढ़ता रहा। जब खरगोश की नींद खुली, तो उसने देखा कि कछुआ फिनिश लाइन के बहुत करीब पहुंच चुका था। वह तेजी से दौड़ा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। कछुआ जीत चुका था!

शिक्षा

धीरे लेकिन लगातार मेहनत करने वाला व्यक्ति अंत में सफलता प्राप्त करता है।

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