Lomdi Aur Saras Ki Kahani in Hindi
लोमड़ी और सारस की कहानी
चालाकी भरी दावत
सारस खुशी-खुशी लोमड़ी के घर गया। लोमड़ी ने स्वादिष्ट खिचड़ी बनाई, लेकिन उसे चपटे थाली में परोस दिया। सारस की लंबी चोंच थी, जिससे वह कुछ भी नहीं खा सका। लेकिन लोमड़ी अपनी छोटी जीभ से आराम से खा रही थी। सारस बहुत असंमझस में था, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा और भूखा ही वापस चला गया।
सारस की चतुराई
कुछ दिनों बाद सारस ने लोमड़ी को रात्रि भोज पर आमंत्रित किया। जब लोमड़ी सारस के घर पहुँची, तो सारस ने खाना लंबी गर्दन वाली सुराही में परोसा। अब लोमड़ी अपनी छोटी जीभ से कुछ भी नहीं खा पाई, जबकि सारस मजे से खाना खा रहा था।
सीख:
लोमड़ी को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने सारस से माफी माँगी। सारस ने उसे माफ कर दिया। इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि जैसा हम दूसरों के साथ करते हैं, वैसा ही हमें वापस मिलता है।
👉 नैतिक शिक्षा:
"दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार करें जैसा आप अपने लिए चाहते हैं।"

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